ईसा मसीह पर निबंध Essay on Jesus Christ in Hindi

ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह पर निबंध (Essay on Jesus Christ in Hindi) कक्षा 5 से लेकर कक्षा 12 तक परीक्षा में भिन्न रूपों से पूछा जाता है। अगर आप यीशु पर हिंदी में निबंध की तलाश कर रहे हैं तो यह लेख आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकता है।

दिए गए निबंध में यीशु के जीवन के सभी पहलुओं का समावेश किया गया है। इस लेख में हमने प्रस्तावना, जन्म, शुरुआती जीवन, शिक्षा, कहानी तथा यीशु मसीह है पर 10 लाइन के बारे में लिखा गया है।

प्रस्तावना (ईसा मसीह पर निबंध Essay on Jesus Christ in Hindi)

ईसा मसीह की जीवनी और उपदेशों के माध्यम से पूरी दुनिया में ईसाई धर्म का प्रचार किया जाता है और लोगों को प्रेम तथा सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाती है।

पूरी दुनिया में ईसाई धर्म को मानने वाले सबसे अधिक लोग पाए जाते हैं। लेकिन उनके सद्वाक्य को कुछ लोग अपनी पाप क्रिया और स्वार्थ को छिपाने के लिए आडंबर के रूप में भी प्रयोग करते आए हैं।

यीशु मसीह को इस्लाम मजहब में ईसा कह कर पुकारा जाता है जिन्हें महानतम पैगंबरों में से एक माना जाता है तथा कहते हैं कि कुरान में भी उनका जिक्र किया गया है।

जब यूरोपीय प्रजा नैतिकता और ज्ञान के अभाव में आपस में ही लड़ने मरने पर उतारू हो चुकी थी तो किसी को आगे आकर धर्म का पाठ पढ़ाना था। ईसा मसीह है उन्हीं व्यक्तियों में से एक थे जिन्होंने पापियों को प्रेम अपनाने की खुली सीख दे डाली जिसके कारण उन्हें तरह-तरह की यातनाएं भी सहनी पड़ी।

ईसा मसीह का जन्म Jesus Christ Birth in Hindi

ईसा मसीह के जीवन का विवरण उनके शिष्यों और बाइबिल में पाया जाता है जिसके अनुसार यीशु की माता नाम मरियम था जो गलीलिया प्रांत की रहने वाली थी। जिनकी सगाई राजवंशी युसूफ नामक एक व्यक्ति से की गई थी जो पेशे से एक बढ़ई का काम करता था।

कहते हैं कि ईश्वरी प्रभाव से मरियम गर्भवती हो गई थी और यूसुफ ने भी इसे ईश्वरी संकेत मानकर उन्हें पत्नी के रूप में मान्यता दी।

जब यह बात वहां के राजा हेरोद को पता चली तो उन्होंने शहर के सभी छोटे बच्चों को मार डालने के प्रयास किए और अपने बच्चे को बचाने के लिए युसूफ उन्हें लेकर मिश्र भाग गए। इसलिए ईसा का जन्म लगभग 4 ईसवी पूर्व में माना जाता है।

यीशु के जन्म के बाद पर्यावरण में चमत्कारी परिवर्तन देखने को मिला था। जब उनका जन्म हुआ था तो दूर-दूर से लोग उन्हें देखने आते थे।

ईसा मसीह का शुरुआती जीवन Early life of Jesus Christ in Hindi

ईसा मसीह के 12 साल के होते होते युसूफ उन्हें लेकर नाजरेथ में चले गए जहां पर यरूशलम में रुक कर 3 दिन तक सत्संग का आनंद लिया। बचपन में ही उन्हें प्रकृति पर्यावरण और जानवरों से गहरा प्रेम हो गया था जिसके कारण वे कभी किसी भी जानवर को नुकसान नहीं पहुंचाते थे।

छोटी उम्र में ही ईसा मसीह यूसुफ के साथ जंगल जाते और लकड़ियां काट कर ले आते। बड़े होते होते उन्होंने एक बढ़ई का पेशा पूरी तरह से सीख लिया।

उनके 13 साल से 29 साल के बीच के जीवन का वर्णन बाइबिल में नहीं मिलता इसलिए कहा जाता है कि 30 साल की उम्र में उन्होंने यूहन्ना से दीक्षा ली। पानी में डुबकी लगाकर ईशा को आत्मज्ञान हुआ और 40 दिन के उपवास के बाद भी लोगों को सेवा और मानवता की शिक्षा देने लगे।

अपने पूरे जीवन में ईसा मसीह ने बहुत से चमत्कार दिखाया है जिसमें से एक बार उन्होंने तीन मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित कर दिया था यह सबसे चमत्कारी घटनाओं में से एक मानी जाती है।

यरुशलम की जनता ने उन्हें बहुत प्रेम किया लेकिन वहीं दूसरी ओर कुछ लोग थे जो उन्हें अपना कट्टर दुश्मन मानते थे और उन्हें सिर्फ पाखंडी कहकर पुकारा करते थे।

ईसा मसीह की शिक्षा Education of Jesus Christ in Hindi

ईसा मसीह के पीछे उनके अनुयायियों की एक बड़ी संख्या तैयार हो चुकी थी जो सदैव उनके साथ रहते थे। वही अनुयाई जगह-जगह घूमकर ईशा के ज्ञान तथा ईसाई धर्म का प्रचार करते।

उनके जीवन से मिलती शिक्षा में ज्यादातर सभी लोगों से भाईचारा और प्रेम की भावना तथा क्षमा को देखा जाता है। ईशा का मानना था कि जो व्यक्ति धर्म के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें ईश्वर ज्ञान जरूर देता है।

ईशा सदैव कहते थे कि किसी भी मनुष्य को व्यभिचारी नहीं होना चाहिए और न ही उसे अहिंसा, हत्या, चोरी तथा दुर्विचारों की शरण में जाना चाहिए।

उनके अनुसार जो व्यक्ति प्रकृति से प्रश्न पूछता है प्रकृति उसे किसी न किसी माध्यम से जवाब जरूर देती है इसलिए वे कहते हैं ढूंढने पर तुम पा सकोगे खटखटाओ तो तुम्हारे लिए द्वार खोला जाएगा।

यीशु के अनुसार अगर कोई व्यक्ति पूरे ध्यान और विश्वास से किसी पहाड़ को भी हिलाने का प्रयास करता है तो वह अवश्य ही सफल होता है।

ईसाई धर्म की सबसे पवित्र पुस्तक बाइबल के अनुसार अपने काम के अलावा किसी और चीज पर किसी व्यक्ति का कोई अधिकार नही है।

वे कहते हैं कि हर व्यक्ति को दान करना चाहिए लेकिन किसी प्रकार से अपना गुणगान न करना चाहिए अर्थात इस प्रकार दान करना चाहिए कि दाहिने हाथ से दान किया जाए तो बाए हाथ को भी पता न चले।

उनके अनुसार आने वाले कल की चिंता करना हर प्रकार से व्यर्थ है क्योंकि जो कुछ है इंसान के हाथ में वर्तमान ही है, चिंता करने से उसे कुछ भी हासिल नहीं हो सकता।

यीशु कहते हैं की जब उपवास किया जाए तो इस प्रकार किया जाए कि अपने दिमाग और चेहरे को उसकी भनक तक न लगे। वे यह भी कहते हैं कि जो व्यक्ति धन के पीछे भागता है वह भगवान के पीछे नहीं भाग सकता।

ईसा मसीह की कहानी Story of Jesus Christ in Hindi

ईसाई धर्म के सबसे पवित्र ग्रंथ बाइबल के अनुसार एक बार रविवार के भोर के समय मरियम कब्र पर आईं और उन्होंने देखा की कब्र से पत्थर गायब हो गया है।

जब उन्होंने शमौन पातरस और दूसरे शिष्यों के पास पहुंचकर कहा की वह लोग कब्र से यीशु का शरीर निकाल कर ले गए तो उनके सभी शिष्य तथा अन्य लोग भागकर कब्र के स्थान पर आए।

जब सभी लोग वहां पहुंचे तो देखा की कब्र में कुछ सफेद कपड़े पड़े हुए हैं लेकिन यीशु वहां पर नहीं है। यह देखकर उनके सभी शिष्य चले गए लेकिन मरियम वहीं बैठ कर रोती रही।

लेकिन रोते-रोते उन्हें कुछ आभास हुआ तो उन्होंने कब्र की तरफ देखा वहां पर सफेद वस्त्र धारण किए और दो देवदूत खड़े थे। देवदूत ने मरियम से पूछा कि तुम क्यों रो रही हो?

तो उन्होंने कहा कि वे लोग यीशु के शव को उठाकर ले गए और वह फिर से बिलखकर रोने लगी। लेकिन जब उन्होंने मुड़ कर पीछे देखा तो श्वेत वस्त्र धारण किए यीशु खड़े हुए मिले।

यीशु को देखकर मरियम का मन थोड़ा शांत हुआ तभी यीशु ने कहा कि मैं अपने परम पिता परमात्मा के पास जा रहा हूं तुम बिल्कुल भी दुखी मत हो। तुम घर जाकर भाइयों की और खुद का देखभाल करो।

इस बात से मरियम का मन का मन पूरी तरह से शांत हो गया और वे वापस आकर उनके शिष्यों से कहा कि उन्होंने प्रभु को देखा है।

ऐसा माना जाता है कि मरियम के साथ साथ उन्होंने अपने कई शिष्यों को दर्शन तथा ईसाई धर्म को आगे बढ़ाने का कार्यभार सौंपा।

ईसा मसी पर 10 लाइन Few Lines About Jesus in Hindi

  1. ईसा मसीह को ईसाई धर्म का संस्थापक माना जाता है इसलिए उन्हें यीशु भी कहते हैं।
  2. यीशु का जन्म बेथलेहम के यहूदी परिवार में हुआ था।
  3. उनकी माता का नाम मरियम और पिता का नाम युसूफ था। 
  4. ईसाई धर्म के लोग ईसा मसीह को ईश्वर का अवतार मानते हैं।
  5. कुरान में ईसा मसीह का जिक्र है।
  6. 30 वर्ष की उम्र तक ईसा मसीह बढ़ई का काम करते रहे।
  7. ईसा मसीह सदा ही सत्य, अहिंसा, क्षमा और सेवा का उपदेश देते थे।
  8. कट्टरपंथी यहूदी धर्म गुरुओं ने ईसा मसीह का खुलकर विरोध किया था।
  9. रोमन गवर्नर पिलातुस ने ईसा मसीह को दर्दनाक मौत सुनाई।
  10. मृत्यु के 3 दिन बाद ईसा मसीह फिर से जीवित हो उठे और 40 दिन बाद स्वर्ग चले गए। 

मृत्य Death

ईसवी 29 में एक गधी पर सवार होकर वह यरूशलम पहुंचे वहां पर उन्होंने अपने शिष्यों के साथ अंतिम बार भोजन किया तथा संकेतो में समझाया की की उनके साथ क्या होने वाला है।

वही उन्हें दंड देने का पूरा ताना-बाना रचा गया जिसमें उनके एक शिष्य जूदास ने उनके साथ विश्वासघात किया जिसके चलते उन्हें यहूदियों की महासभा द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

यहूदियों की महासभा ने उन्हें ईश्वर का पुत्र होने का दावा करने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई और ईसा मसीह कोई विद्रोह न भड़का सके इसलिए उन्हें तुरंत क्रूस पर लटकाने का आदेश दे दिया।

पहले उनके सर पर कांटों का ताज रखा गया जिससे उनका पूरा मस्तक लहूलुहान हो गया। उसके बाद भारी-भरकम क्रूस उठाने को कहा गया। ईसा मसीह उसको उसको खुद उठा कर चलें इसके बाद उन्हें क्रूस पर लटका दिया गया।

निष्कर्ष Conclusion

इस लेख में आपने ईसा मसीह पर निबंध हिंदी में (Essay on Jesus Christ in Hindi) पढ़ा। आशा है यह लेख आपको पसंद आया हो अगर यह निबंध आपके लिए सहायक से दुआ हो तो उसे शेयर जरूर करें।

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