आज के इस लेख में हमने गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर निबंध (Guru Gobind Singh Jayanti in Hndi) प्रस्तुत किया है। इस आर्टिकल में हमने प्रस्तावना, उनके जन्म और मृत्यु, उनका महत्व, सिद्धांत, और उत्सव के विषय के बारे में पूरी जानकारी।
हमने गुरु गोविंद सिंह जयंती पर आपको एक लघु और आसान सा निबंध बताया है जिससे आप 100, 300, 500,और 700 words बनाकर मदद ले सकते है।
प्रस्तावना Introduction
गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के सम्मान में मनाया जाता है। इन्होंने सिख धर्म के लिए बहुत ही महान कार्य किए। इन्होंने ही आदि श्री ग्रंथ साहिब जी को पूरा किया था।
महान संत गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म और माता-पिता Birth and Parents of Guru Gobind Singh
गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर, 1666 पटना बिहार ,भारत में हुआ था। (हालांकि उनका जन्म दिवस कहीं पर भी स्पष्ट रूप से दिया नहीं गया है इसलिए हमने यह तारीख विकिपीडिया से लिया है) । इनके पिता का नाम गुरु तेग बहादुर और माता का नाम गुजरी था। गुरु गोविंद सिंह जी को बचपन में गोबिंद राय नाम से पुकारा जाता था। उनके जन्म के बाद वह पटना में 4 वर्ष तक रहे। और उनके घर का नाम तख्त सहित पटना साहिब के नाम से जाना जाता है।
गुरु गोबिंद सिंह जी जयंती का महत्त्व Importance of Guru Gobind Singh Jayanti
उनकी जयंती सिख धर्म लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी और सिख धर्म के लोगों को कई सकारात्मक बातें सिखाई थी। वह एक महान आध्यात्मिक गुरु, योद्धा, दार्शनिक, और कवि थे।
सिख धर्म के लोग गुरु गोबिंद सिंह जयंती का पर्व कैसे मनाते हैं? How Guru Gobind Singh jayanti is celebrated?
गुरु गोबिंद सिंह जी का सिख धर्म के क्षेत्र में महान योगदान रहा है इसलिए सिख धर्म के लोग गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती को बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ पूरे विश्व भर में मनाते हैं।
इस दिन सिख धर्म के लोग सुबह से नहा धोकर नए कपड़े पहन कर गुरुद्वारा में मत्था टेकने जाते हैं और अपने परिवार और रिश्तेदारों के सुख समृद्धि की कामना करते हैं। गुरुद्वारा में लंगर भी लगता है इस दिन लोगों को प्रसाद खाने को मिलता है।
गुरुद्वारा में गुरु गोबिंद सिंह जी की गीत, कविता और कथा सुनकर लोग आनंद लेते हैं और उन्हें याद करते हैं। सिख धर्म के लोग शहरों में जुलूस निकालते हैं, भक्ति गीत गाते हैं।
इस दिन गुरबाणी कीर्तन किया जाता है जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाएं होती हैं। गुरुद्वारा के बाहर भंडारा होता है। भंडारा के दौरान वहां पर स्थित लोगों को स्वादिष्ट मिठाई, शरबत बांटते है।
सिख धर्म के लिए सिद्धांत Principles for Sikh people given by Guru Gobind Singh
खालसा पंथ के निर्माण के बाद उन्होंने अपना नाम गुरु गोबिंद राय से गुरु गोबिंद सिंह रख दिया। गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा धर्म को 5 महत्वपूर्ण सिद्धांत मे समझाया हैं केश ,कंघा, कड़ा,किरपान, कच्चेरा। इसीलिए इनसे जुड़े हुए लोग इन 5 चीजों को अपने साथ रखते हैं।
गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरु कैसे बने? How he became the 10th Sikh guru?
गुरु गोबिंद सिंह जी के पिता गुरु तेग बहादुर सिख धर्म के नौवें गुरु थे। गुरु तेग बहादुर सिंह कश्मीरी पंडितों का धर्म परिवर्तन मुस्लिम धर्म में बनाए जाने के खिलाफ थे । उन्होंने इस पर खुलकर विरोध किया और खुद भी इस धर्म को अपनाने से मना कर दिया।
इस कारण उन्हें हिंदुस्तान के बादशाह औरंगजेब ने चांदनी चौक पर उनका सर कलम करवा दिया। इस घटना के बाद उनके पुत्र गुरु गोबिंद सिंह जी को सिख धर्म के दसवें गुरु के रूप में नियुक्त किया गया।। इस कारण इन्हें सिख धर्म के दसवें गुरु मानते हैं।
गुरु गोबिंद सिंह द्वारा किए गए मुख्य कार्य और उपदेश Major Works by Guru Govind Singh
- गुरु गोबिंद सिंह जी ने हमेशा अन्याय और अत्याचारों का विरोध किया।
- इन्होंने पवित्र किताब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पूरा किया।
- इन्होंने खालसा पंथ को स्थापित किया।
- उन्होंने लोगों को बताया कि कभी भी धन पर घमंड नहीं करना चाहिए।
- गरीबों को दान देना चाहिए।
- दुख और मुश्किल में पढ़े व्यक्तियों की हमेशा मदद करनी चाहिए।
- स्वयं को नशा और बुरी आदतों से बचाएं।
- अपने हर काम को पूरी लगन और निष्ठा से करें।
- गुरु गोबिंद सिंह जी ने हमेशा लोगों को निडर रहने को कहा।
गुरु गोबिंद सिंह जी की मृत्यु Death of Guru Gobind Singh
गुरु गोबिंद सिंह जी का मृत्यु 7 अक्टूबर 1708 हजूर साहिब, नांदेड़, भारत में हुआ था।
निष्कर्ष Conclusion
भले ही वह सिख धर्म के अंतिम गुरु थे पर उन्होंने सिख धर्म के लिए बहुत ही महान कार्य किये और शिक्षाएं प्रदान की। गुरु गोबिंद सिंह जयंती के दिन इनके महान कार्यों को आज भी विश्व भर में याद किया जाता है और करते रहेंगे।