प्रिय बापू आप अमर हैं पत्र लेखन Priya Bapu Aap Amar Hain – Letter Writing in Hindi

इस लेख में हमने प्रिय बापू को अमर हैं Priya Bapu Aap Amar Hain (महात्मा गांधी) को प्रेरणादायक पत्र लिखा है। इस पत्र से विद्यार्थी अपने स्कूल, कॉलेज, और शहर में होने वाले प्रतियोगिताएं के लिए मदद ले सकते है।

प्रिय बापू आप अमर हैं – महात्मा गांधी जी को पत्र लेखन Priya Bapu Aap Amar Hain – Letter Writing in Hindi

प्रिय बापू, आपको मेरा सादर प्रणाम। आदरणीय बापू जी, आप से हमें अपार सकारात्मक प्रेरणा मिलती है। आपके जीवन से हमें कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है।

प्रिय बापू जी आज भारत को आप की पुनः जरूरत है। आज भी आप किसी न किसी रूप में हमारे बीच अमर हैं। आपका जीवन अत्यंत सरल है। आप एक शांतिप्रिय, सत्य और प्रेम में आस्था रखने वाले व्यक्ति हैं।

विदेश में रहकर भी, अपने देशवासियों के लिए आपके दिल में जो स्नेह और ममता था, आपके इतिहास से मुझे पता चला। विदेश में भी रहकर बापू जी आपने मांसाहारी भोजन कभी हाथ नहीं लगाया। क्योंकि आपने अपनी मां को वचन दिया था कि आप विदेश जाकर मांसाहारी खाना, मदिरा का सेवन नहीं करेंगे। आपकी यह बात मुझे हमेशा सत्य पर अमल करना सिखाती है।

आप ने देश वापस आकर लोगों को एकत्रित करके अहिंसा के पथ पर चलने का आदेश दिया। आप ने अपनी बातों से नहीं, बल्कि अपने अहिंसा से भारत को आजादी दिलाई थी। जिसके कारण आज भी आपका नाम अमर है।

प्रिय बापू जी आपकी और एक इच्छा थी स्वच्छ भारत का सपना। जो कई हद तक पूरा होता हुआ दिख रहा है। लोग आज स्वच्छता के प्रति जागरूक हो चुके हैं। हमारे आस-पास के वातावरण साफ-सुथरा नजर आने लगे हैं। पुरे भारत में स्वच्छ भारत अभियान की लहर सी है। में जानती हूँ प्रिय बापू जी आप जहाँ कहीं भी हैं यह सब देखकर आप बहुत खुश हो रहे होंगे। जब तक मैं जिंदा रहूँगी बापू जी तब तक मैं आपका आदर और सम्मान करूंगी और आपके बताए हुए मार्ग पर चलूंगी।

आप बच्चों से अत्यधिक प्रेम करते थे। आप एक ईमानदार इंसान थे। प्रिय बापू जी आपने बिना ब्रिटिश वस्त्र का उपयोग किए अंग्रेजों को झुका दिया और भारत को आजाद कराया। प्रिय बापू आप अमर हैं।

प्रिय बापू आप अमर हैं आप से जुड़ी हुई बहुत सी प्रेरणादायक कहानियां है। जो इस प्रकार है-

प्रिय बापू जी जब आप चरखा संघ के लिए देश भर में धन इकट्ठा कर रहे थे उसी समय उड़ीसा में किसी सभा को संबोधित करने गए। आपके भाषण के बाद एक बूढ़ी गरीब महिला वहां आकर खड़ी हुई। जिसके कपड़े पूरी तरह से फटे हुए थे,और वह चल भी नहीं पा रही थी। किसी तरह वह भीड़ से होते हुए आपके पास पहुंची।

उसने कहा मुझे गांधी जी से मिलना है। तब वह आप तक पहुंच गई आपको देखते ही आपका पैर छूकर प्रणाम किया। फिर वह अपनी साड़ी के पल्लू में बांधे एक तांबे के सिक्के को आपके चरणों में रख दी। तब आपने वह सिक्का उठाया और अपने पास रख लिया। उस समय चरखा संघ के कोषागार मुख्य जन्म लाल ने आपको वह सिक्का मांगा, तो आपने उसे देने से मना कर दिया।

जन्म लाल ने हंसते हुए कहा मैं चरखा संघ का हजारों का चेक संभालता हूं और आप मुझ पर इस सिक्के को देने से मना कर रहे हैं। तब आपने कहा यह तांबे का सिक्का उन हजारों सिक्कों से कहीं किमती है। यदि किसी के पास लाखों है तो 1000-2000रु दे देता है, तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

लेकिन यह सिक्का शायद उस औरत की कुल जमा पूँजी थी। उसने अपना सारा संसार ,धन दौलत दे दिया। उसने कितनी उदारता दिखाई और कितना बड़ा बलिदान दिया। इसीलिए यह तांबे का सिक्का मेरे लिए एक करोड़ से भी बढ़कर है।

प्रिय बापू आपके बचपन की एक कहानी मुझे निडर बनाती है। एक बार की बात है जब आप अंधेरी रात में अकेले थे। और आपको डर लग रहा था। आप ऐसा सोच रहे थे कि आप के आस पास कोई भूत है और आपको आकर अचानक से झपट लेगा। उस दिन इतना तेज अंधेरा था कि कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं दिख रहा था और आपको एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना था।

पर आप हिम्मत करके  उस कमरे से बाहर निकले लेकिन डर के मारे आपका धड़कन बहुत तेज चल रहा था और आपके डर की भावना नजर आ रही थी। आपके घर में काम करने वाली रंभा यह सब दरवाज़े के पास खड़े होकर के देख रही थी। क्या हुआ बेटा? उसने हंसते हुए पूछा। आप ने उत्तर दिया मुझे डर लग रहा है, दाई।

उन्होंने कहा डर! बेटा किस चीज का डर? आपने डरते हुए कहा देखिए कितना अंधेरा है और मुझे भूतों से डर लगता है। रंभा ने प्यार से आपके सर पर हाथ फेरते हुए कहा- जब कभी भी अंधेरे से दर लगे राम जी का नाम लो और कोई भूत तुम्हारे निकट नहीं आएगा। कोई तुम्हारा कुछ नहीं कर पाएगा राम जी तुम्हारी रक्षा करेंगे। रंभा के बातों ने आपको हिम्मत दे और आपने राम नाम लेते हुए अपने कमरे से बाहर निकले।

उस दिन से आपने कभी अपने स्वयं को अकेला नहीं समझा और ना ही आपको डर लगा। आपका विश्वास था कि जब तक राम आपके साथ हैं आपका कुछ नहीं होगा। इस विश्वास ने आपको जीवन भर सकती दी। इसीलिए परमेश्वर के पास जाते समय भी भी आपके मुंह से राम का नाम निकला। प्रिय बापू आप अमर हैं।

आपकी एक और अनमोल कहानी जो मुझे इस जीवन के हम एक हैं का सही अर्थ दिखता है।

कोलकाता में हिंदू-मुस्लिम के बीच झगड़ा हो रहे थे। तमाम कोशिशों के बावजूद भी लोगों को शांत नहीं कर पा रहे थे। ऐसी स्थिति में आप वहां पहुंचे और एक मुस्लिम मित्र के यहां ठहरे। आपके वहां पहुंचने से वहां झगड़ा थोड़ा शांत हुआ लेकिन कुछ ही दिनों में वहां पर और भी अत्यधिक लोग एक दूसरे के प्रति भड़क गए।

तब आपने आमरण अनशन करने का निर्णय लिया और 31 अगस्त 1947 को आसान पर बैठ जाए। इसी दौरान एक दिन आधी उम्र का एक आदमी उनके पास पहुंचा और बोला मैं तुम्हारे मृत्यु का पाप अपने सर पर नहीं ले सकता, लो रोटी खा लो। फिर वह अचानक रोने लगा और बोला मैं मरूंगा तो नर्क ही जाऊँगा। फिर आपने विनम्रता कहा क्यों? क्योंकि मैंने 8 साल के एक मुस्लिम लड़के की जान ले ली।

आपने पूछा तुमने उसे क्यों मारा? वह आदमी रोते हुए बोला, क्योंकि उन्होंने मेरे मासूम बच्चे को जान से मार दिया। आपने उसकी बात सुनकर कुछ देर सोचा। फिर बोले, मेरे पास एक उपाय है, यह बात सुनकर वह आदमी आपके तरफ आश्चर्य होकर देखा।

तुम उसी उम्र का एक लड़का खोजो जो इस लड़ाई में अपने मां-बाप को खो दिए हो। उसे अपने बच्चे की तरह पालो। लेकिन एक चीज सुनिश्चित कर लो कि वह बच्चा एक मुस्लिम होनी चाहिए और उसका परवरिश अपने बच्चे की तरह करो। इतना कहकर आपने अपनी बात खत्म की। आपके इन सब बातों को सुनकर मेरे रोगंटे खड़े हो जाते हैं। आपके इन्हीं सब अनमोल कथनों के कारण ही में कहती हूँ – प्रिय बापू आप अमर हैं।

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