महात्मा गांधी पर भाषण Speech on Mahatma Gandhi in Hindi (800W)

आज हमने इस आर्टिकल में हमने महात्मा गांधी पर भाषण (Speech on Mahatma Gandhi in Hindi) लिखा है। इस भाषण से स्कूल और कॉलेज के छात्र अपने कार्यक्रम और परीक्षा के लिए मदद ले सकते हैं।

महात्मा गांधी पर भाषण Speech on Mahatma Gandhi in Hindi (800W)

आदरणीय प्रधानाचार्य जी, शिक्षक गण एवं मेरे प्यारे सहपाठियों एवं भाई हम बहनों आज मैं आप लोगों के समक्ष इन महान पुरुष महात्मा गांधी जी के बारे में कुछ शब्द बोलने के लिए उपस्थित हुए हुं।

उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है। उनके मानवता के प्रति और भारत के आजादी के प्रति किए गए प्रयास का उल्लेख शब्दों में नहीं किया जा सकता।

भारत एक महान देश है जिसका एक समृद्ध इतिहास है। यहां महान और शक्तिशाली नेताओं ने जन्म लिया है। उनमें से एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे हमारे, आदरणीय बापू महात्मा गांधी जी। वे ना केवल भारत में अपितु पूरे विश्व में सम्मानित थे।

महात्मा गांधी का असली नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनकी माता का नाम श्रीमती पुतलीबाई तथा उनके पिता का नाम श्री करमचंद गांधी था। गांधी जी का जन्म गुजरात के पोरबंदर नामक एक छोटे से शहर में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। 

अपने जीवन में उन्होंने कई महान कार्य किए जो आज भी हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। इन महान आत्मा में  जगत में  छुआछूत, गरीबी, बाल विवाह, जातिवाद, भेदभाव आदि बुराइयों और अंग्रेजी सरकार के नीतियों के खिलाफ अहिंसात्मक तरीके से जन आंदोलन किया।

जिन्होंने नील की खेती को बंद करने के लिए चंपारण सत्याग्रह बिहार में किया। लगान वृद्धि की समाप्ति के लिए गुजरात में खेड़ा सत्याग्रह और खलीफा की सत्ता की स्थापना के लिए खिलाफत आंदोलन किया। स्वराज की स्थापना के लिए असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, व नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी मार्च तथा अंग्रेजों को भगाने के लिए अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन किया।

गांधी जी ने करो या मरो का नारा दिया। साथियों गांधीजी के शिक्षा की बात की जाए तो उन्होंने लंदन से वकालत की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में 21 साल बिताए, जहां उनके राजनीतिक विचार और नैतिकता का विकास हुआ। यहीं से गांधी जी ने एक महान नेता के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। यहां उन्हें अपने रंग और जाति के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ा।

एक श्वेत ट्रेन अधिकारी द्वारा रंग और जाति के कारण ट्रेन कोच से बाहर फेंके जाने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि, उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए।

इस अनुभवों ने मन में गहरा असर डाला और उसके बाद से उन्होंने मानवता की उत्थान की दिशा में कार्य करना शुरू किया। यहीं से उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह की शुरुआत की। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और 1914 में गांधीजी और दक्षिण अफ्रीकी सरकार एक समझौते किया जहां भारतीय मांगों को स्वीकार किया गया।

1915 में वे भारत वापस आए और बाद में वे साबरमती के किनारे बस गए जहां उन्होंने सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की। यहां उन्होंने समाज की बुरी प्रणालियों जैसे जातिवाद, के खिलाफ लड़ाई जारी रखी और उन्होंने राजस्व की ओर काम करना भी शुरू कर दिया। उन्होंने महिलाओं को सशक्तिकरण और किसान को अधिकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साथियों उनके कुछ महान आंदोलन हैं जैसे – असहयोग आंदोलन 1920, दांडी मार्च 1930 (नमक सत्याग्रह), और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन।

अपने पूरे जीवन में उन्होंने अहिंसा का पालन किया। उनके प्रयासों ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आखिरकार 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। गांधीजी कुछ नया सीखने के पक्षधर थे। उनका कहना था कि ऐसे जियो जैसे आपको कल मरना है और सीखो ऐसे जैसे आपको सदैव जिंदा रहना है। साथियों गांधी जी का कहना था कि यदि आप रामायण का पाठ करते हो तो वह व्यर्थ है यदि आप राम जैसे नहीं बनते।

अपने पूरे जीवन में सभी जाति और पंच लोगों के बीच एकता लाने के लिए काम किया। स्वतंत्रता और भारत के विभाजन के बाद, उन्होंने हिंदू और मुसलमानों के साथ लाने के लिए कड़ी मेहनत की। इससे कुछ लोग नाराज हो गए और 30 जनवरी 1948 को गांधी जी को नाथूराम गोडसे में गोली मार दी।

उन्हें सभी योग दानों के लिए राष्ट्रपिता के नाम से संबोधित किया जाता है।

प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को उनका जन्मदिन भारत में गांधी जयंती के रूप में तथा पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

क्या आप जानते हैं महात्मा गांधी जी ने 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभाली। देश में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण एवं आत्मनिर्भरता के लिए उन्होंने प्रमुख योगदान दिया।

उनकी मृत्यु के उपरांत भी उनकी विचार उनकी आत्मकथा “My Experiments With Truth” के माध्यम से हमें प्रभावित करते हैं। गांधीजी के बारे में इतनी सारी बातें हैं कि उन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। आज भी पूरा भारत देश आपको पूरे दिल से सम्मान और आपके योगदान के लिए शत-शत नमन करता है।

अंत में मैं इस खूबसूरत भक्ति गीत के साथ अपना भाषण समाप्त करती हूं।

        रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम।

  धन्यवाद।

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